आगर-मालवा। राजस्थान के झालावाड़ जिले के डग थाना क्षेत्र में आगर मालवा पुलिस के छ नामजद अधिकारियों और नब्बे अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद मुश्किले कम होती नहीं दिख रही है। मामले में चौमहला कोर्ट में परिवाद दायर करने वाले हमीद खान ने आगर-मालवा पुलिस अधीक्षक को एक आवेदन सौंपकर मध्यप्रदेश पुलिस के उन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल निलंबन और विभागीय जांच की मांग की है, जिनके विरुद्ध न्यायालय के आदेश पर राजस्थान में FIR दर्ज की गई है। इस आवेदन की कॉपी NDTV के पास मौजूद है।
स्पीड पोस्ट के माध्यम से पुलिस अधीक्षक आगर मालवा को भेजे गए आवेदन में बताया गया है कि उन्होंने राजस्थान के चौमहला स्थित अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) न्यायालय में एक परिवाद प्रस्तुत किया था। इस परिवाद में मध्यप्रदेश पुलिस के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा कथित रूप से की गई एक संदिग्ध और फर्जी NDPS कार्रवाई को चुनौती दी गई थी।

आवेदक के अनुसार न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध पाए जाने पर संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे। न्यायालय के आदेश के पालन में राजस्थान के डग पुलिस थाना में आगर-मालवा जिले के कुछ थाना प्रभारियों एवं अन्य पुलिसकर्मियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जा चुका है।
आवेदन में कहा गया है कि जिन पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है, उन पर फर्जी तरीके से NDPS प्रकरण में फंसाने और आपराधिक साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने जैसे गंभीर आरोप हैं। ऐसे में उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाना चाहिए ताकि वे अपने पद और प्रभाव का उपयोग कर जांच या साक्ष्यों को प्रभावित न कर सकें

जिन अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज हुई है, वे अभी भी संबंधित थानों में पदस्थ हैं और यदि उन्हें तत्काल नहीं हटाया गया तो राजस्थान के डग थाने में दर्ज प्रकरण की निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।
आवेदक हामिद खान के पुत्र शाहीन खान ने एनडीटीवी को फोन पर कहा है कि आगर मालवा पुलिस के अधिकारियों और कर्मीयो ने मिलकर जब इतनी बड़ी फर्जी कार्यवाही कर दी तो फिर वे जांच प्रभावित करने के लिए साक्ष्यों के साथ कुछ छेड़छाड़ कर सकते है। ऐसे इनका इसी थाने पर पद पर बने रहना कई तरह के सवाल खड़े करता है और शंका पैदा करता है। इन्हें तुरंत वहां से हटाया जाना चाहिए।
आवेदन में यह भी मांग की गई है कि राजस्थान के डग थाने में दर्ज FIR को आधार बनाते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उच्चस्तरीय विभागीय जांच (Departmental Enquiry) गठित की जाए।
आवेदक का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने दूसरे राज्य के अधिकार क्षेत्र में जाकर नियम-विरुद्ध और कथित रूप से फर्जी कार्रवाई की। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि तथ्य सामने आ सकें और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सके।
आवेदन के माध्यम से हमीद खान ने पुलिस अधीक्षक आगर-मालवा से अनुरोध किया है कि न्यायालय के आदेश और पुलिस नियमों को ध्यान में रखते हुए आरोपित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए तथा उनके विरुद्ध विभागीय जांच शुरू कराई जाए, जिससे निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके और पुलिस विभाग की साख बनी रहे।
आगर मालवा पुलिस अधीक्षक दिलीप कुमार सोनी ने कहा कि अभी उन्हें इस तरह का कोई आवेदन नहीं मिला है। यदि कोई पत्र प्राप्त होता है तो अध्ययन करने के बाद आवश्यक होने पर नियमों के अंतर्गत जो भी होगा किया जाएगा।
बरहाल NDPS मामले में स्थानीय पुलिस की फजीहत कम होने के बजाय बढ़ती दिख रही है।
(नोट: आवेदन में लगाए गए आरोप आवेदक के दावे हैं। मामले में अंतिम सत्यता और दोष-निर्दोषता का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।)