शिक्षक का कार्य केवल पुस्तकों का ज्ञान देना नहीं, अपितु उसके समग्र रूप से विकास भी करना है। – ऋचा श्रीवास्तव

  • भविष्य दर्पण/नीरज सोलंकी

संतोष और कृतज्ञता का संगम है। वर्षों तक शिक्षा विभाग का हिस्सा रहने के बाद औपचारिक रूप से सेवा से निवृत्त हो रही हूं। ऐसा लग रहा है मानो जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय पूर्ण हो रहा है। शिक्षक का कार्य केवल पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान देना नहीं होता बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, संस्कार और भविष्य के निर्माण में योगदान देना भी होता है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान जिला देवास में 28 वर्ष का सफर बेहद उतार चढ़ाव वाला रहा। यह बात शुक्रवार को अपनी सेवानिवृत्ति पर आयोजित विदाई समारोह में वरिष्ठ व्यख्याता, शिक्षिका – ऋचा श्रीवास्तव ने कही। डाइट प्रभारी प्राचार्य अक्षयसिंह राठौड़, शैलेश राठौड़, नोशद अहमद कुरैशी, कल्पना जायसवाल, ऋषिकेश कदम, रिया शर्मा, पटेल जी व डाइट देवास के समस्त छात्र परिवार की ओर से शाल, श्रीफल एवं प्रशस्ति पत्र भेंट कर श्रीमती ऋचा का सम्मान किया गया। अपने 39 वर्ष 5 माह के कार्यकाल में सीखने सिखाने के मूलमन्त्र का बिना रुके निर्वहन किया। प्रचार्य श्री राठौड़ ने उनके सरल स्वभाव, किसी भी कार्य को करने की लगन ने उन्हें उत्तम शिक्षक माना। एवं अपने शिक्षक साथियों द्वारा अश्रुपूरित विदाई दी गई। इस समारोह में प्रथम व द्वितीय वर्ष के समस्त छात्र अध्यापकों के लिए मार्मिकता पुर्ण पल था, जिसमे राजेन्द्र कुमार जोशी, दीपक कुमार शर्मा, कुणाल पटेल, अनुराग खन्ना, शुभम शर्मा, हंसा मालवीय, आशीष सिंदल, आश्रय जोशी, सरोज, आदि ने सहयोग किया। कार्यक्रम में विजेन्द्र रेकवाल ने संचालन किया, जिसमे अपनी कविता से सबको मोहित किया। आभार श्री दीपक कुमार शर्मा,आश्रय जोशी ने व्यक्त किया।

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