शिव महापुराण कथा के तृतीय दिवस में शिव सती प्रसंग एवं शिव पार्वती विवाह का भावपूर्ण वर्णन श्रद्धालु हुए भावविभोर।

 

शिवमहापुराण कथा के तृतीय दिवस में शिव-सती प्रसंग एवं शिव-पार्वती विवाह का भावपूर्ण वर्णन, श्रद्धालु हुए भावविभोर

भविष्य दर्पण घनश्याम भदौरिया

चुगलवाड़ा काटाफोड़ में चल रही शिवमहापुराण कथा के तृतीय दिवस पर मंडलेश्वर से पधारी सुश्री दीदी चेतना भारतीजी द्वारा शिव-सती प्रसंग तथा शिव-पार्वती विवाह की दिव्य कथा का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा स्थल पर भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरा वातावरण शिव भक्ति में सराबोर हो उठा।

दीदी चेतना भारतीजी ने माता सती के आत्मदाह प्रसंग को अत्यंत मार्मिक शैली में प्रस्तुत किया, जिसमें दक्ष प्रजापति के अहंकार और शिवजी के विरह का गहन चित्रण किया गया। इस प्रसंग को सुनकर कई श्रद्धालु भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि यह कथा हमें यह सिखाती है कि ईश्वर की भक्ति में अहंकार का कोई स्थान नहीं होता।

इसके उपरांत शिव पार्वती विवाह प्रसंग का वर्णन हुआ, जिसमें हिमालय पुत्री पार्वती द्वारा शिवजी को पति रूप में पाने के लिए किए गए तप और उनकी अडिग श्रद्धा को दर्शाया गया। विवाह की झांकी और विवाह उत्सव का चित्रण करते हुए दीदी जी ने सभी को भक्ति, समर्पण और साधना का संदेश दिया।

कथा स्थल “जय शिव शंकर”, “हर हर महादेव” और “जय माता पार्वती” के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्ज्वलन कर महादेव का आशीर्वाद प्राप्त किया।

इस अवसर पर आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण का भी आयोजन किया

शिवमहापुराण कथा के तृतीय दिवस में शिव-सती प्रसंग एवं शिव-पार्वती विवाह का भावपूर्ण वर्णन, श्रद्धालु हुए भावविभोर

डोडा पोखरनी। ग्राम डोडा पोखरनी में चल रही शिवमहापुराण कथा के तृतीय दिवस पर मंडलेश्वर से पधारी सुश्री दीदी चेतना भारतीजी द्वारा शिव-सती प्रसंग तथा शिव-पार्वती विवाह की दिव्य कथा का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा स्थल पर भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरा वातावरण शिव भक्ति में सराबोर हो उठा।

दीदी चेतना भारतीजी ने माता सती के आत्मदाह प्रसंग को अत्यंत मार्मिक शैली में प्रस्तुत किया, जिसमें दक्ष प्रजापति के अहंकार और शिवजी के विरह का गहन चित्रण किया गया। इस प्रसंग को सुनकर कई श्रद्धालु भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि यह कथा हमें यह सिखाती है कि ईश्वर की भक्ति में अहंकार का कोई स्थान नहीं होता।

इसके उपरांत शिव पार्वती विवाह प्रसंग का वर्णन हुआ, जिसमें हिमालय पुत्री पार्वती द्वारा शिवजी को पति रूप में पाने के लिए किए गए तप और उनकी अडिग श्रद्धा को दर्शाया गया। विवाह की झांकी और विवाह उत्सव का चित्रण करते हुए दीदी जी ने सभी को भक्ति, समर्पण और साधना का संदेश दिया।

कथा स्थल “जय शिव शंकर”, “हर हर महादेव” और “जय माता पार्वती” के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्ज्वलन कर महादेव का आशीर्वाद प्राप्त किया।

इस अवसर पर आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण एवं रात्रि भजन संध्या का भी आयोजन किया गया।

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