सतवास-राजगढ़ जिले के पचोर-सारंगपुर मार्ग पर पड़ाना कस्बे के पास सोमवार सुबह करीब 9 बजे हुए दर्दनाक हादसे ने देवास जिले के सतवास तहसील के ग्राम धांसड़ को गहरे सदमे में डाल दिया। झिरी नाले पर निर्माणाधीन करीब 30 फीट लंबे पुल के ऊपर से तेज बारिश का पानी बह रहा था। इसी दौरान धांसड़ गांव से कड़लावद जा रही ईको वैन तेज बहाव की चपेट में आकर नाले में बह गई। वैन में एक ही परिवार के 11 लोग सवार थे। हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि दो लोग किसी तरह तैरकर सुरक्षित बाहर निकल आए।
हादसे में शंकर चौहान, उनकी पत्नी सागर बाई, बेटा विशाल चौहान, बहू पूजा, पूजा की बेटी महक, जवाई हुकम सिंह पवार, उनकी पत्नी रीनू पवार और उनके बच्चे राजवीर व जसप्रीत की मौत हुई है। परिवार के दो सदस्य सुरक्षित बाहर निकल आए। हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। क्रेन की मदद से ईको वैन को नाले से बाहर निकाला गया, लेकिन वाहन के अंदर कोई शव नहीं मिला। इसके बाद आसपास के क्षेत्र में तलाश की गई।
देर रात सतवास लाए जाएंगे शव: हादसे में मृत लोगों के शव देर रात सतवास लाए जाने की जानकारी है। शवों को सतवास के शासकीय अस्पताल में रखा जाएगा। मंगलवार सुबह शवों को उनके गांव धांसड़ ले जाया जाएगा, जहां से अंतिम संस्कार के लिए किटी गांव ले जाया जाएगा। यहां नर्मदा किनारे एक साथ अंतिम संस्कार किए जाने की तैयारी है।
जानकारी के मुताबिक परिवार के सदस्य सोमवार तड़के करीब 3:30 बजे सतवास से कड़लावद गांव के लिए रवाना हुए थे। पड़ाना के पास झिरी नाले पर पुल निर्माणाधीन है और बारिश के कारण पानी पुल के ऊपर से बह रहा था। प्रत्यक्षदर्शी महेंद्र परमार ने बताया कि उन्होंने चालक को पानी के तेज बहाव को देखते हुए वाहन आगे नहीं ले जाने की सलाह दी थी, लेकिन वाहन आगे बढ़ गया। पुल पर सुरक्षा रेलिंग नहीं होने के कारण ईको वैन नाले में जा गिरी। वाहन सतवास के धांसड़ निवासी मुकेश सिंह चौहान के नाम पर पंजीकृत बताया गया है।
हादसे की खबर धांसड़ गांव पहुंचते ही मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बागली विधायक मुरली भंवरा ने गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और संवेदना व्यक्त की। प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपए की आर्थिक सहायता और अंतिम संस्कार के लिए पांच-पांच हजार रुपए की सहायता दिए जाने की जानकारी दी गई है। इस हादसे ने निर्माणाधीन पुल पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुल अधूरा होने के बावजूद मौके पर पर्याप्त बैरिकेडिंग, चेतावनी और सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी। जांच के बाद ही हादसे की पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।