रतलाम में चल रहे हैं तीन बुक बैंक, गरीब हो या अमीर; हायर सेकंडरी तक की किताबें मुफ्त मिलती हैं


बुक बैंक की सफलता को देखकर रतलाम के ही गोशाला रोड और काटजू नगर में दो और बुक बैंक शुरू हो चुके

नमकीन सेंव के लिए विख्यात रतलाम नई पहचान गढ़ रहा है। मात्र तीन साल पहले शुरू हुए एक बुक बैंक ने अब तक 50 हजार पेरेंटस के करीब 15 करोड़ रुपए बचा दिए हैं। स्कूली बच्चों के कोर्स की किताबें औसतन तीन हजार रुपए की आती हैं, इस लिहाज से यह अनुमानित आंकड़ा सामने आया है। रतलाम में अब तीन बुक बैंक हो गए हैं। यहां केजी से हायर सेकंडरी तक किताबें निशुल्क मिलती हैं। प्राथमिकता उन बच्चों को जिनके माता-पिता बच्चे की पढ़ाई का खर्च मुश्किल से वहन कर पाते हैं। सिलसिले की शुरुआत रोचक है।

चार साल पहले रतलाम के सबसे प्रतिष्ठित और 8 हजार बच्चों की संख्या वाले स्कूल सेंट जोसफ स्कूल ने बच्चों के लिए ट्रैक सूट अनिवार्य किया और इसके लिए एक विशेष दुकान तय कर दी। दो हजार रुपए में यह ट्रैक सूट सिर्फ उसी दुकान से लाना था। पालकों ने इसका जबरदस्त विरोध किया तो एक से तीन दुकानें हो गईं नतीजतन कीमत 700 रुपए तक आ गई। सबसे पहले बुक बैंक के संस्थापक समाजसेवी अनुराग लोखंडे कहते हैं-यही वो समय था जब बुक बैंक की स्थापना का ख्याल आया। हर साल सीजन में यह बैंक सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक पूरी क्षमता के साथ काम करता है। बच्चे खुद या उनके माता-पिता उनका बच्चा जिस क्लास में पास हो चुका है उस क्लास की किताबें यहां जमा कर अगले क्लास की किताबें ले जाते हैं। इस बुक बैंक की सफलता को देखकर रतलाम के ही गोशाला रोड और काटजू नगर में दो और बुक बैंक शुरू हो चुके हैं।

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